आकाश लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
आकाश लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, 11 जुलाई 2013

एकबारगी...

एक छोटे से पिजड़े में कैद
बेहद रंगीन बे-जुबान
दो चिडि़या
जो न तो चहकती है,
न हिलती, न डुलती है।
यहां तक कुछ खाने पीने को
भी नहीं मांगती।
कभी कभी डोलती हवा ही
चिडि़या समेत पिजड़े में
जान डालने में
सामर्थ होती है।
फिर  भी न जाने क्यों मेरा मन
उन्हें आजाद कर
'इंडिया गेट' पर असली को धोखा देती ..चहचहाती बे- जुबान चिड़िया 
आकाश में उड़ते देखने का होता है
एकबारगी।