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बुधवार, 14 सितंबर 2016

डिजिटल वर्ल्ड की न्यू 'वुमनिया'


एक समय जानीमानी साहित्कार एवं महिला मुद्दों पर बेबाक टिप्पणी करने वाली मैत्रेयी पुष्पा ने कहा था कि आज गांव-देहात में मोबाइल ने स्त्रियों को अधिक स्वतंत्रता प्रदान की है। लेखिका का यह कहना बिलकुल वैसे ही है जैसे कभी यूरोपियन देषों में महिला अधिकारों के समर्थकों ने कहा था कि गर्भनिरोधक उपायों ने महिलाओं को कहीं अधिक स्वतंत्र और सक्षम बनाया है। कुछ ऐसा ही तब कहा गया जब हमारे घरों की रसोई में प्रेषर कुकर और गैस-स्टोव ने दस्तक दी। इन बातों से यह पता चलता है कि टेक्नॉलजी ने स्त्रियों के जीवन में ऐसे परिवर्तन किये जिसे हमारे तथाकथित धर्म षास्त्र और तमाम कानून भी एक साथ मिलकर नहीं कर पाए। महिलाओं के हाथों में छह इंची मोबाइल ऐसा हथियार है जिसके सहारे न केवल वे आज अपने सपनों की उड़ान भर रही हैं बल्कि इस मेल डॉमिनेटिंग सोसायटी में अपना एक मुकाम और कोना तलाष रही है।
आजकल एक महिलाओं को लेकर एक नई षब्दावली चल पड़ी है ‘डिजीटल वूमन।’ यानी ऐसी महिलाएं जो खूब नेट सैवी हो और सर्फिंग में रुचि लेती हां। अगर आंकड़ों की भाषा में बात करे तो पुरुषों के मुकाबले 49 फीसदी महिलाएं आज देष में इंटरनेट यूज करती हैं। यानी आधी आबादी का एक लगभग पूरा भाग इंटरनेट का लाभ ले रहा है। इंटरनेट में उनकी उपस्थिति का यही कारण है कि सोषल मीडिया में भी महिलाएं अपनी हिस्सेदारी दिखा रही हैं। चाहे वह सबसे लोकप्रिय सोषल साइट फेसबुक हो या वाट्स-एप, सभी जगह वे अपनी मुखर आवाज के साथ उपस्थित है। ट्वीटर, गूगल प्लस, लिंकलिड्स, ब्लॉग, यू-ट्यूब ये कुछ ऐसी जगहें हैं जहां पर महिलाएं बेखौफ आकर अपने रूटीन लाइफ को आसान करती हैं और बेबाकी से अपने विचार षेयर करती हैं। आज सोषल साइट्स केवल मेट्रो सिटीज या हाई प्रोफाइल महिलाओं के जीवन का हिस्सा नहीं है, बल्कि यहां पर आम घरेलू महिलाएं बडे़ षिद्दत से आती हैं। हम एक ओर तो वाट्सएप पर अपने पड़ोस की अांटी को किटी पार्टी मैनेज करते हुए देख सकते है, वहीं तेजतर्रार और सफल महिलाओं को देष-दुनिया के तमाम मुद्दों पर बहस में भाग लेते भी देख सकते हैं। ऐसी तमाम महिलाओं की उपस्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि माइक्रो ब्लॉगिंग ट्वीटर पर प्रसिद्ध उद्योपति किरण मजूमदार षॉ काफी सक्रीय हैं, वहीं लोगों का विरोध झेलने वाली पत्रकार एवं टिप्पणीकार सागरिका घोष भी हैं। बोलने के मामले में हद तक बदनाम महिलाएं अपने आपको इस मीडियम के माध्यम से अभिव्यक्त करना चाहती है और इसको आसान किया है डिजिटल टेक्नॉलजी ने। यह देखना बहुत ही दिलचस्प है कि कैसे यह छोटा सा गैजेट वूमेन लाइफ को बदलकर रख दे रहा है। यह क्या कम है कि यह डिजिटल वर्ल्ड महिलाओं के छोटे-मोटे काम ही आसान नहीं कर रहा है बल्कि उनकी सुरक्षा को भी सुनिष्चित कर रहा है।

कुछ सालों से इंटरनेट उपयोग करने वाली कुछ महिलाओं से जब बात की गई तो उन्होंने समानरूप से एक बात कबूल की कि इंटरनेट, सोषल साइट ने उनके जीवन को बदल दिया है। वे पहले से ज्यादा सोषल व एक्टिव हो गई हैं। षादी के बाद जब उन्हें लगता था कि अब स्वयं के लिए कुछ कर पाना न-मुमकिन सा हो गया है या खुद के लिए जिंदगी समाप्त सी हो गई है तब इस डिजिटल वर्ल्ड ने उनके लिए सारा संसार दिखा दिया। इस डिजिटल वर्ल्ड ने उनके लिए जीवन के कुछ नए दरवाजे खोल दिए। इससे वे ऐसी दुनिया के करीब आई हैं जो उनके लिए ‘प्रोहिवेटेड’ थी, लगभग बंद थी। आज सोषल साइट के जरिए देष के उत्तर में रहने वाली एक स्त्री दक्षिण की दूसरी या विदेष में रहने वाली महिलाएं देष की दूसरी महिलाओं के संपर्क में आसानी से आ गई है। जहां वे दिल खोलकर बोल और बतिया रही हैं। यहां पर वे अपने और उनके कष्टों और कठिनाइयों को षिद्दत से सुन और महसूस कर पा रही हैं। महिलाओं के लिए इंटरनेट केवल मनोरंजन या एंटरटेन का साधन मात्र नहीं है बल्कि इंटरनेट का यह कोना ‘ओ वुमनिया’ टाइप का है जो केवल उनके लिए ही है उनके जैसा ही है।