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सोमवार, 16 फ़रवरी 2015

इस जहाँ की श्रेष्ठ प्रेम कविताएँ!!

प्रेम यहां वहां जहां तहां उकेर दिया जाता है। प्रेम करने वालों को कहां ध्यान रहता है कि वह अपनी इन प्रेम अभिव्यक्तियों को कहाँ लिखे। वह कवि या कवयित्री नहीं होते है जो अपनी अभिव्यक्ति के लिए उचित समय और उचित स्थान के साथ कागज-कलम-दवात ढूढता घूमें । वह जहां ठहरता है वहीं रम जाता है। उसकी कविता होती है महज अपने प्रेमी और प्रेमिका का नाम उकेरना। जहां जगह पाता है गोदने लगता है उसका नाम। और मान लेता है है कि उसने लिख दी इस संसार की सबसे श्रेष्ठ , खूबसूरत कविता।  इस जहाँ की शाश्वत कविता, नीचे देखिये,...










है कि नहीं!

रविवार, 13 जुलाई 2014

जिंदगी में कविता

जिंदगी के हर बिखरे हर्फ को सजाती हूँ
दरख्तों के बीच से आती धूप को सम्हालती हूँ
दरवाजें की ओट से रास्ता निहारती हूँ
आँखों में आये खारे पानी को छुपाती हूँ मैं !!



शुक्रवार, 14 फ़रवरी 2014

इस वसंत में

प्रेम जानने के लिए
खरीद लाई
प्रेम विशेषांक
प्रेम के सभी महाविशेषांक
प्रेम में पकी कविताएं
प्रेम पर लिखी सभी कहानियों के
हर शब्द को
पढ़ा मैंने
गुना मैंने
चखा मैंने
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फिर भी
पैदा नहीं  कर पाई
कोई प्रेम विज्ञान
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पर आज
एक बच्चे की
मासूम मुस्कान ने
फूलों से सिंचे रस जैसा
शहद  बना दिया
मेरे गाँव से एक बच्ची की  मनमोहक मुस्कान युक्त तस्वीर 
मेरे ओठों पर
बगैर किसी
मधुमास के।

बुधवार, 19 सितंबर 2012

प्रेम का टी-प्वांइट


पहले सीध रास्ता ही था
इधर उधर नहीं मुड़ना था
मंजिल तो सामने ही दिख रही थी।
इसलिए कोई जद्दोजहद नहीं थी।
किसी को ओवरटेक भी नहीं करना था
था ही सीध, सरल, समतल रास्ता।
साथ में ठंडी हवा, शीतल छाया भी,
कोई मोड़, घुमाव भी नहीं दिख रहा था।
जिससे पहले ही सावधन हो जाया जाए।

जैसे जैसे आगे बढ़ते गए, रास्ता सीधा ही दिखता रहा।
मंजिल पहुंच के दायरे में दिख रही थी
अचानक...
यह टी प्वांइट कैसा!
यहां तो इतने लोग खडे़ है।
भला कब से?
आगे क्यों नहीं बढ़े?
एक से पूछा भई, अब वहां किस रास्ते से जाना पड़ेगा?
कोई उत्तर नहीं मिला।
कांधे पर हाथ रखकर झकझोरते हुए पूछा।
फिर भी कोई उत्तर नहीं।

लगता है इसी बात का उत्तर जानने के इंतजार में
वे वर्षों से बुत बन गए।
0000
पीछे मुड़कर अपना सीध रास्ता देखना चाहा-
आश्चर्य,
रास्ते की जगह झाड़-झंगाड़ का
एक आदिम जंगल उग गया था वहां..
... तत्काल।