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शहर कविता विहीन नहीं हुआ

केन नदी और कवि  केदारनाथ अग्रवाल, बांदा शहर की दो बड़ी पहचान है। आज  केदारनाथ जी का जन्मदिवस है । केदार जी की जन्म शताब्दी के दौरान जब बांदा जाना हुआ तब मुझे केदार जी के घर जाने का अवसर मिला । जिसकी कुछ तस्वीरें यहाँ  दे रही हु। इस समय कवि की कुटिया जीर्ण-शीर्ण अवस्था मे है। फिलहाल इसे केदारनाथ शोध पीठ न्यास  घोषित कर दिया गया है, इसके सचिव नरेंद्र पुंडरीक जी है। वे ही इस कवि कुटिया की देखभाल करते है। कुछ साहित्यिक गतिविधियों के कारण कभी- कभी इसके दरवाजे खोले जाते है...... वरना अधिकांश समय यह बंद ही रहता है ...फिर भी हम बांदा वासियों के लिए इसका बचा हुआ अस्तित्व मायने रखता है....कि शहर कविता विहीन नहीं हुआ है ....