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March, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

उत्तराधिकार के अधिकार से महरूम बेटियां

हाल ही में एक अध्ययन सामने आया है। इसमें बताया गया है कि लिंग भेद मिटाने या कम करने के उद्देश्य से उत्तराधिकार या विरासत संबंधी कानूनों बनाने के साथ सुधार किया गया। विरासत कानूनों में हर सुधार के बाद सोचा गया था कि इससे महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी। पर इस अध्ययन में आश्चर्यजनक तथ्य सामने आया। चौंकाने वाला तथ्य यह है कि यह सुधार समाज में बेटे की ललक या बेटियों के बरक्स पुत्र की वरीयता कम नहीं कर सका। 2018 में किए गए इस अध्ययन के अनुसार, 1970 से 1990 के बीच लड़कियों की विरासत संबंधी कानूनों को मजबूत बनाने के लिए जो कई तरह के बदलाव किए गए उससे अनजाने में ही कन्या भ्रूण हत्या और उच्च महिला शिशु मृत्यु दर को बढ़ावा मिला। अध्ययन में पाया गया कि महिलाओं को विरासत के अधिकार देने से माता-पिता को बेटी से ज्यादा हानि महसूस हुई। इसका बहुत बड़ा कारण बेटी का शादी के बाद ससुराल जाना है, और इससे बेटी के संपत्ति ससुरालीजनों के पक्ष में चले जाना था।

2018 में जर्नल ऑफ डेवलपमेंट इकोनॉमिक्स में प्रकाशित इस अध्ययन को किंग्स कॉलेज विश्वविद्यालय, न्यूयार्क विश्वविद्यालय और एसेक…

ऑस्कर में बुलंद हुुई महिला आवाज

दिल्ली से मात्र साठ किलोमीटर की दूरी पर स्थित हापुड़ जिले के लोग एक दूसरे के साथ खुशियां बांट रहे हैं। कारण, हापुड़ के एक गांव में बनी 25 मिनट की डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘पीरियड, एंड ऑफ सेंटेंस’ को 91वें एकेडमी अवार्ड्स यानी ऑस्कर में बेस्ट डॉक्युमेंट्री शॉर्ट सब्जेक्ट कैटेगरी के लिए चुन लिया गया है। यह डॉक्युमेंट्रीमहिलाओं के पीरियड यानी महावारी को टैबू मानने को लेकर बनी है। इसलिए जब इस खुशी का इजहार डॉक्युमेंट्री की भारतीय सह-निर्माता गुनीता मोंगा ने यह लिखकर किया कि हम जीत गए, इस दुनिया की हर लड़की तुम सब देवी हो… अगर जन्नत सुन रही है तो। …यह दिखाता है कि पीरियड जैसा बालॉजिकल विषय हमेशा से कितनी भ्रांतियों की जकड़न में रहा है। जिस पर खुद महिलाएं तक बात नहीं कर पाती हैं, जैसा कि इस डॉक्युमेंट्री में दिखाया गया है।

‘पीरियड, एंड ऑफ सेंटेंस’ डॉक्युमेंट्री की शुरुआत ही कुछ किशोरियों से इसी सवाल के साथ होती है, जिस पर वे बिना झिझक के बोल तक नहीं पाती हैं। चाहे यह सवाल उनसे उनके ही घर पर किया गया हो, या फिर स्कूल में। जब लड़कियों का यह हाल है, तो पुरुषों का क्या हाल हो सकता है, यह भी इस डॉक्…