गुरुवार, 1 जनवरी 2026

बैंड बाजा बारात और सोशल मीडिया


 

हमारे हाथों में मोबाइल एक ऐसी डिवाइस है, जिसमें अधिकांश गतिविधियों की लाॅगबुक दर्ज रहती है, चाहे या अनचाहे। यही कारण है कि यहां होने वाली गतिविधियां शादी जैसे नाजुक रिश्तों पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल रही हैं। अगर जल्द नहीं संभलें, तो सोशल मीडिया में बिखरा यह स्यापा हमारे कई रिश्तों को खा जाएगा।

 

2025 को लवयापानाम से एक मूवी आई थी, जिसकी कहानी जेन-जी के रिलेशनशिप पर आधारित थी। कहानी में शादी के लिये नायक नायिका के पिता के सामने उपस्थित होता है और नायिका के साथ शादी की इच्छा व्यक्त करता है। पिता राजी होता है पर एक शर्त के बाद। शर्त होती है कि एक दिन के लिये नायक और नायिका अपना-अपना मोबाइल एक दूसरे को दे देंगे, प्रयोग करने के लिये। और यही से प्यार-स्यार की जगह लब का स्यापा शुरू हो जाता है। जहां दोनों नायक-नायिका प्यार की दुहाई देकर शादी करने वाले थे, वहीं एक दूसरे के मोबाइल हाथ में आने के बाद उनकी ऐसी सच्चाई सामने आती है, जिससे दोनों अब तक अंजान थे। एक दूसरे के सामने आती इन सच्चाइयों के कारण उनके बीच टकरार, दरार और फाइट शुरू हो जाती है। उनका विश्वास चुक जाता है, फलतः रिश्ता टूट जाता है। चूंकि यह फिल्म है, तो बड़े-बुजुर्ग बीच में आकर संबंधों के बीच में पड़ी दरार को भरने का काम करते हैं। दोनों को रियल लाइफ के सबक सिखाते हैं, फलतः लवयापाकी हैप्पी एंडिग हो जाती हैं, पर क्या रियल लाइफ में ऐसा संभव है।

शायद नहीं। तभी तो एक चौकाने वाली रिपोर्ट एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र ने हाल ही में प्रसारित की है। स्थानीय रिसर्च के बाद आई इस खबर में बताया गया है कि इंदौर जैसे बड़े शहर में 40 दिनों में ही 150 शादियां रद्द हो गईं। वजह कई थीं, पर सबसे बड़ी वजह बनी सोशल मीडिया पोस्ट। भावी दुल्हा और दुल्हनों की पुरानी सोशल मीडिया से जुड़ी गतिविधियां सामने आने से जो अविश्वास की धारा पैदा हुआ, वह अंततः शादी रद्द होने के मुकाम को पहुंच गई। रिपोर्ट के अनुसार 62 फीसदी शादियां टूटने की वजह सीधे तौर पर सोशल मीडिया से उपजी गतिविधियां थीं। इन गतिविधियों को लेकर दोनों पार्टिज में जो कहा-सुनी हुई, उसने झगड़े का रूप ले लिया, आखिर रिश्ता खतम करना पड़ा। पहले जहां शादी टूटने की वजह कोई गंभीर पारिवारिक, सामाजिक मामला होता था, जिसके सामने आने के बाद शादियां कैंसिल कर दी जाती थी, पर आज 60 से 70 फीसदी मामलों में सोशल मीडिया में किये गये पोस्ट, कमेंट्स, इमोजी, लाइक्स या फिर फ्रेंड लिस्ट में वह क्यों है, को लेकर मन-मुटाव यहां तक पहुंच रहा है कि शादी ही रद्द हो रही हैं। यह देखकर समझा जा सकता है कि सोशल मीडिया की पहुंच हमारे जीवन में अब कहां तक हो चुकी है। परिणाम है रिश्तों का बिखर जाना, क्योंकि यह रियल लाइफ है फिल्म नहीं।

पहले जहां शादी टूटने की वजह कोई गंभीर पारिवारिकसामाजिक मामला होता थाजिसके सामने आने के बाद शादियां कैंसिल कर दी जाती थीपर आज 60 से 70 फीसदी मामलों में सोशल मीडिया में किये गये पोस्टकमेंट्सइमोजीलाइक्स या फिर फ्रेंड लिस्ट में वह क्यों है?

शादी जैसे रिश्तों के बीच सोशल मीडिया का यूं फिल्मी खलनायक के रूप में उभरने का मतलब है कि हम डिजिटल जिंदगी को लेकर इतने सीरियस नहीं हुये हैं, जितना हमें होना चाहिए था। हमें लगता है कि सोशल मीडिया में हम कुछ भी करके निकल जाएंगे, किसी को या हमें कुछ फर्क नहीं पड़ेगा। ऐसा सोचना भी आज सोशल मीडिया के महत्व को कम करके आंकना है। आज जब भी कोई कंपनी अपने लिये एक अच्छे इम्प्लाई को ढूंढ़ती है, तो कम से कम उसका लिंक्डइन प्रोफाइल जरूर चेक करती है। यह प्रैक्टिस उनके लिये एक अच्छा उम्मीदवार ढूंढ़ने में काफी मददगार होता है। आज एक रिक्रूटर के लिये अपने इम्प्लाई की सोशल मीडिया स्क्रीनिंग जरूरी हो गई है, भले ही यह वैध न हो। 2023 के रिज्मेबिल्डर सर्वे के अनुसार 73 फीसदी हायरिंग में मैनेजरों ने उम्मीदवारों की सोशल मीडिया प्रजेंस के नंबर दिये और उनकी उम्मीदवारी को आगे बढ़ाया। जबकि 85 फीसदी ने माना कि उन्होंने अपने उम्मीदवारों की उम्मीदवारी रद्द कर दी, जब उन्हें उनकी ऑनलाइन प्रोफाइल में कुछ गलत दिखा। तो समझा जा सकता है कि हमारी सोशल मीडिया संबंधी गतिविधियां कहां तक पहुंच रखती हैं। तो फिर शादी-विवाह जैसे मामले इनसे दूर कैसे रह सकते हैं।

2023 के रिज्मेबिल्डर सर्वे के अनुसार 73 फीसदी हायरिंग में मैनेजरों ने उम्मीदवारों की सोशल मीडिया प्रजेंस के नंबर दिये और उनकी उम्मीदवारी को आगे बढ़ाया। जबकि 85 फीसदी ने माना कि उन्होंने अपने उम्मीदवारों की उम्मीदवारी रद्द कर दीजब उन्हें उनकी ऑनलाइन प्रोफाइल में कुछ गलत दिखा।

सोशल मीडिया संबंधी यह मामले शादी से पहले ही पता चलने के बाद शादी रद्द होने का कारण बन रहे हैं। पर लगभग दो दशकों से आपसी रिश्ते खराब करने का एक कारण सोशल मीडिया दर्ज हो रहा है, ऐसा कई रिसर्च हमें बता रही है। कपल्स हों, या फे्रंड्स सोशल मीडिया का अधिक उपयोग उनके आपसी रिश्तों में दूरियां पैदा कर देता है। कंप्यूटर इन ह्यूमन विहैवियर में प्रकाशित एक शोध रिपोर्ट में बताया गया है कि शादीशुदा जिंदगी की गुणवत्ता और सोशल मीडिया दोनों का संबंध रहा है। जो लोग सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं करते हैं, वे रेगुलर सोशल मीडिया इस्तेमाल करने वालों की तुलना में अपनी शादी में 11 फीसदी अधिक खुश रहते हैं। इसी रिपोर्ट में बहुत ही विस्तार से बताया गया है कि पहली बार पति-पत्नियों के बीच सोशल मीडिया कैसे घुस गया और रिश्ते खराब करने लगा। इस संबंध में पहली रिपोर्ट 2009 में आई थी, जब यूके की डिवोर्स आॅनलाइन कंपनी के एक एग्जीक्यूटिव, मार्क कीनन ने पाया कि कंपनी की 5000 सबसे नये तलाक के आवेदनों में से 989 में फेसबुकशब्द आया था। इसी तरह, अमेरिकन एकेडमी ऑफ मैट्रिमोनियल लॉयर्स (एएएमएल) के 2010 के एक सर्वे में पाया गया कि पांच में से चार वकीलों ने बताया कि फेसबुक से मिले सबूतोंके आधार पर तलाक के मामलों की संख्या बढ़ रही है। इसके अलावा, सोशल नेटवर्क साइट पर धोखा देने का पता लगाने में मदद के लिए वेबसाइट्स भी बनाई गई हैं। उदाहरण के लिए FacebookCheating.com इसके द्वारा अपने पार्टनर के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर का पता लगाया जा सकता था।

इसकी वजह है इंटरनेट और सबसे बड़ी ताका-झांकी की जगह सोशल मीडिया’ यानी हमारी फेसबुकइंस्टाग्रामलिंक्डइनटिकटाॅकटिंडर या एक्स प्रोफाइल। अगर जेन-जी की बात की जायेतो जितनी वे आपस में बाते नहीं करते उतना वे टेक्स्ट’ करते हैं।


यह सब तब हो रहा था, जब फेसबुक जैसी एक ही सोशल मीडिया साइट हमारे जीवन में आ गई थी। और इस पर मौजूद हम इस बात के लिए हम एसोर थे कि यहां कुछ भी किया जा सकता है, हमें कौन जजकरेगा। लेकिन हम जजकिये जा रहे थे। इसका असर भी पड़ने लगा था। यह रिपोर्ट हमारे देश समाज की न हो, पर आज हमारी भी वहीं स्थिति हो गई है। जब सोशल मीडिया का संसार काफी फैल चुका है। यह इंदौर की इस छोटी सी रिपोर्ट से समझा जा सकता है। हमारे हाथों में मोबाइल एक ऐसी डिवाइस है, जिसमें हमारे द्वारा की गई अधिकांश गतिविधियों की एक लाॅगबुक तैयार होती है, हम चाहें या न चाहें। इसकी वजह है इंटरनेट और सबसे बड़ी ताका-झांकी की जगह सोशल मीडियायानी हमारी फेसबुक, इंस्टाग्राम, लिंक्डइन, टिकटाॅक, टिंडर या एक्स प्रोफाइल। अगर जेन-जी की बात की जाये, तो जितनी वे आपस में बाते नहीं करते उतना वे टेक्स्टकरते हैं। उनका सोना, जागना, खाना, पीना सभी कुछ सोशल मीडिया ही निर्धारित कर रहा है। यहां होने वाले मेल-मिलाप, बातचीत चाहे उनकी भाषा डिजिटल ही क्यों न हो, यह सब हमारा भविष्य तय कर रहे हैं। सोशल मीडिया के बहाने कोई भी थोड़े प्रयासों से हमारे बारे में बहुत कुछ जान सकता है। भले ही यहां की गईं गतिविधियां का सीधा मतलब वह न हो, जो दूसरा कोई समझ रहा है। लेकिन इसकी जबावदेही हमारी ही बनती है, और सभी उठने वाले सवालों के जवाब हमें ही देने होते हैं। नहीं तो लवयापाकी तरह अच्छी खासी लाइफ को बिगबाॅस बना दिया है इस फोन नेकी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए निजी जीवन में रिश्तों को लेकर हमारे किरदार पर कोई उंगली न उठा दे, इसके लिये ईमानदारी बनाये रखनी पड़ेगी यहां भी, और वहां भी।