ठिकाना
रविवार, 10 जनवरी 2010
कौन सा विकल्प?
आज
डर
का
कुछ खास रंग
देख
पा
रही हूँ ,
जो कोहरे की तरह
सफेद है ...या
धुंए की तरह
एकदम काला
डर के ये दोनों रंग
या कहे
दोनों
पक्ष
चुनने का विकल्प
कौन सा होगा मेरा ?
एक रंग में सब कुछ
देखने की सुविधा है
तो दूसरे में
खुद को खोने की।
(चित्र : clarkvision.com)
1 टिप्पणी:
अविनाश वाचस्पति
ने कहा…
खूब कहा है आपने
शब्द पुष्टिकरण को हटा लीजिएगा। इससे हटाना लाभप्रद रहेगा।
31 जनवरी 2010 को 7:08 am बजे
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
बस आज 'एक दिन'
बस आज 'एक दिन' अलार्म बजने पर क्या नहीं उठूंगी सबसे पहले कोई दे जायेगा सुबह की चाय क्या मेरे बिस्तर पर नही बेलनी पड़ेगी आज रोटिया...
शनिचर हरता!
प्रत्येक शनिवार हमारा शनिचर उतारने के लिए मिल जायेगे, हर चौराहे और रेड लाइट पर अबोध, बुझे से, गंदे -फटे कपड़े में बहुत से बचपन। एक लोटे में...
ओ! मेरे संत बैलेंटाइन
ओ! मेरे संत बैलेंटाइन आप ने ये कैसा प्रेम फैलाया प्रेम के नाम पर कैसा प्रेम " भार" डाला आप पहले बताएं प्यार करते हुए आप ने कभी ब...
पानी के लिए सौतन लाते पति
कहते हैं कि तीसरा विश्व युद्ध पानी के लिए होगा। तीसरे विश्व युद्ध का इंतजार किए बिना देश की अधिसंख्य महिलाएं रोज ही पानी के लिए युद्धस्तर...
सन्नाटे में है दिल्ली की एक रात
सन्नाटा इस शहर के आधी रात का चुभ रहा है मुझे। बगल की बिल्डिंग के मुंडेर पर बैठे कबूतर ने अपने डैने खोलकर अगड़ाई ली। कही...
छज्जे जितनी जगह
घर पर अपने छज्जे पर आती थोड़ी सी गुनगुनी धूप, बादल की छांव, बारिस की फुहार बचाए रखना चाहती हूँ उन धूधली, विसूरती खाली शामों के ...
देवी पूजन : गुम होता बचपन
शक्ति पूजन भारतीय संस्कृति और धर्म का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। देश के एक भाग में नहीं बल्कि पूरे देश में शक्ति के रूप में स्त्री रूप का ...
प्रेम का टी-प्वांइट
पहले सीध रास्ता ही था इधर उधर नहीं मुड़ना था मंजिल तो सामने ही दिख रही थी। इसलिए कोई जद्दोजहद नहीं थी। किसी को ओवरटेक भी नहीं कर...
स्मृतियों का ढेर
दोछत्ति पर पड़ा कबाड़ है स्मृतियों का ढेर या फिर विस्म्रतियों का ................................ तीन टांग की कुर्सी एक रंगहीन गुलदान छोटू...
बैंड बाजा बारात और सोशल मीडिया
हमारे हाथों में मोबाइल एक ऐसी डिवाइस है , जिसमें अधिकांश गतिविधियों की लाॅगबुक दर्ज रहती है , चाहे या अनचाहे। यही कारण है कि यहां होने...
1 टिप्पणी:
खूब कहा है आपने
शब्द पुष्टिकरण को हटा लीजिएगा। इससे हटाना लाभप्रद रहेगा।
एक टिप्पणी भेजें