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देश का पहला महिला मॉल

केरल के कोझीकोड जिले के बीचोबीच स्थापित पांच मंजिला कुदुंबश्री महिला मॉल की विशेषता यह है कि यहां महिलाओं से संबंधित सभी प्रकार की वस्तुएं और सेवाएं उपलब्ध होंगी। और इनको उपलब्ध कराने वाली सभी महिला कर्मचारी ही होंगी। बताने वाली सबसे बड़ी खूबी यह भी है कि इतने बड़े उद्यम को खड़ा करने वाली भी सभी दस महिलाएं ही हैं। कुदुंबश्री महिला मॉल कोझीकोड कॉरपोरेशन कुदुंबश्री का प्रोजेक्ट था जिसे कोझीकोड डिस्ट्रिक कुदुंबश्री मिशन के सहयोग से पूरा किया गया है। कोझीकोड कॉरपोरेशन कुदुंबश्री के तहत उन दस महिलाओं के साहस को धन्यवाद देना चाहिए जिन्होंने इतनी बड़ी योजना के बारे न केवल सोचा, बल्कि उसे मूर्तरूप भी दिया। इस मॉल की परिकल्पना में 36 हजार स्क्वायर फीट की जगह पर 60 दुकानें हैं, जहां प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कम से कम 300 महिलाओं को रोजगार मिलेगा। इस मॉल की देखभाल और प्रशासन महिलाओं के हाथों में ही रहेगा। मॉल का सारा स्टॉफ भी महिला होंगी। इस मॉल में सुपर मॉर्केट, फूडकोर्ट, ड्राई क्लीनिंग, कार वॉशिंग, हैंडीक्रॉफ्ट, बेबी केयर, विभिन्न घरेलू सामान और बुक स्टॉल होंगे। इन सबके अतिरिक्त यहां भविष्य में कांफ्रेंस रूम, ट्रेनिंग सेंटर और कार पार्किंग की सुविधाएं देने की योजना भी हैं।
देश की महिलाओं के लिए यह एक उत्साहवर्द्धक खबर है, इसलिए नहीं कि देश में एक ऐसा मॉल है जहां महिलाओं से संबंधित सभी तरह का सामान और सेवाएं उपलब्ध होंगी और देरसबेर ऐसा मॉल हमारे आसपास भी खुल जाएगा, जहां हम जा सकेंगी। वास्तव में महिलाओं के लिए यह खबर इसलिए उत्साहवर्द्धक है कि यह एक ऐसा मॉल या उद्यम है जिसे न केवल महिलाओं ने मिलजुल कर स्थापित किया है, बल्कि उसे चलाने और आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी संभाल रही हैं। यही बात इस खबर में निहित है, जिसे महिलाओं को समझना होगा। देश में महिलाएं अपना खुद का बिजनेस खोलने और चलाने के लिए ज्यादा उत्सुक नहीं रहती हैं। इसके बहुत से सामाजिक, आर्थिक और व्यक्तिगत कारण हो सकते हैं। अगर ग्रामीण स्तर पर बात की जाए तो कृषि और पशुपालन के जरिए अपनी घरेलू आमदनी बढ़ाने तक सीमित हो जाता है। शहरों में महिला उद्यमियों की बात की जाए तो वे अपने घरों में कुछ सेवाएं देने का काम शुरू कर देती हैं। वास्तव में हमारी सामाजिक संरचना के चलते महिलाएं भी अपना बिजनेस खड़ा करने से अधिक एक निश्चित घंटों के लिए जॉब पर जाना अधिक पसंद करती हैं।ऐसी परिस्थतियों में बिजनेस करना उनके लिए अधिक जोखिम वाला हो जाता है। एक बिजनेस उनका अधिक समय और समर्पण मांगता है। हमारी सामाजिक संरचना में जहां महिलाओं को घरेलू जिम्मेदारी के लिए भी फुल टाइम जिम्मेदार माना जाता है, वहां महिलाएं इस तरह का जोखिम उठाने के लिए खुद को असमर्थ पाती हैं।
केरल महिला साक्षरता और महिला उद्यमियों की दृष्टि से संवर्द्धक राज्य है। पर देश के बहुत से इलाकों में महिलाएं अपना उद्यम लगाने के बारे में सोचती तक नहीं हैं। हां, उन्हें अपने कॅरियर की दृष्टि और आर्थिक परेशानी होने पर वे कहीं नौकरी कर पैसे कमाने के बारे में ज्यादा उत्सुक रहती हैं। जिस तरह महिला अपने कॅरियर के बारे में सोचें और उस पर अमल भी करें, यह बात भारतीय परिवेश में जुदा बात होती है, उसी तरह महिलाएं अपना उद्यम खोले और चलाएं यह भी समाज के लिए अनोखी बात होती है। सवाल है कि महिला उद्यमशीलता पर इतना जोर क्यों दिया जाना चाहिए? विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसे संथानों का मानना है कि यदि देश की श्रमशक्ति में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों के बराबर हो जाए, तो देश की जीडीपी में ढाई प्रतिशत तक का उछाल देखा जा सकेगा। जीडीपी के अतिरिक्त महिलाओं की इस तरह भागीदारी सामाजिक चेतना का भी निर्माण करती है, जो देश को समग्र रूप से आगे ले जाने का काम करेगी। पिछले साल इन्हीं दिनों यानी नवंबर, 2017 को महिला उद्यमियों के बारे में देश में शीटवर्क डॉट कॉम ने एक शोध किया। इसके अनुसार महिलाएं उद्यमी हों, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपके यहां महिला कितनी शिक्षित और जागरुक हैं। इसके अध्ययन से पता चलता है कि देश के दक्षिण के राज्य जैसे आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल,पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में सबसे अधिक लघु और मध्यम तरह की महिला उद्यमियों को देखा गया है। इसका कारण यहां महिला शिक्षा की उच्च दर और महिला सशक्तिकरण बताया गया।
इसी तरह नार्थ-ईस्ट के राज्यों जैसे अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और नागालैंड में भी अन्य राज्यों की तुलना में महिला उद्यमी कम, पर पुरुषों के मुकाबले यहां महिला उद्यमी अधिक पाई गईं। इसी तरह इस शोध से यह भी पता लगाया कि लगभग 80 फीसदी महिला उद्यमियों ने अपना बिजनेस अपने पैसों से खकेरल के कोझीकोड जिले के बीचोबीच स्थापित पांच मंजिला कुदुंबश्री महिला मॉल की विशेषता यह है कि यहां महिलाओं से संबंधित सभी प्रकार की वस्तुएं और सेवाएं उपलब्ध होंगी। और इनको उपलब्ध कराने वाली सभी महिला कर्मचारी ही होंगी। बताने वाली सबसे बड़ी खूबी यह भी है कि इतने बड़े उद्यम को खड़ा करने वाली भी सभी दस महिलाएं ही हैं। कुदुंबश्री महिला मॉल कोझीकोड कॉरपोरेशन कुदुंबश्री का प्रोजेक्ट था जिसे कोझीकोड डिस्ट्रिक कुदुंबश्री मिशन के सहयोग से पूरा किया गया है। कोझीकोड कॉरपोरेशन कुदुंबश्री के तहत उन दस महिलाओं के साहस को धन्यवाद देना चाहिए जिन्होंने इतनी बड़ी योजना के बारे न केवल सोचा, बल्कि उसे मूर्तरूप भी दिया। इस मॉल की परिकल्पना में 36 हजार स्क्वायर फीट की जगह पर 60 दुकानें हैं, जहां प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कम से कम 300 महिलाओं को रोजगार मिलेगा। इस मॉल की देखभाल और प्रशासन महिलाओं के हाथों में ही रहेगा। मॉल का सारा स्टॉफ भी महिला होंगी। इस मॉल में सुपर मॉर्केट, फूडकोर्ट, ड्राई क्लीनिंग, कार वॉशिंग, हैंडीक्रॉफ्ट, बेबी केयर, विभिन्न घरेलू सामान और बुक स्टॉल होंगे। इन सबके अतिरिक्त यहां भविष्य में कांफ्रेंस रूम, ट्रेनिंग सेंटर और कार पार्किंग की सुविधाएं देने की योजना भी हैं।
देश की महिलाओं के लिए यह एक उत्साहवर्द्धक खबर है, इसलिए नहीं कि देश में एक ऐसा मॉल है जहां महिलाओं से संबंधित सभी तरह का सामान और सेवाएं उपलब्ध होंगी और देरसबेर ऐसा मॉल हमारे आसपास भी खुल जाएगा, जहां हम जा सकेंगी। वास्तव में महिलाओं के लिए यह खबर इसलिए उत्साहवर्द्धक है कि यह एक ऐसा मॉल या उद्यम है जिसे न केवल महिलाओं ने मिलजुल कर स्थापित किया है, बल्कि उसे चलाने और आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी संभाल रही हैं। यही बात इस खबर में निहित है, जिसे महिलाओं को समझना होगा। देश में महिलाएं अपना खुद का बिजनेस खोलने और चलाने के लिए ज्यादा उत्सुक नहीं रहती हैं। इसके बहुत से सामाजिक, आर्थिक और व्यक्तिगत कारण हो सकते हैं। अगर ग्रामीण स्तर पर बात की जाए तो कृषि और पशुपालन के जरिए अपनी घरेलू आमदनी बढ़ाने तक सीमित हो जाता है। शहरों में महिला उद्यमियों की बात की जाए तो वे अपने घरों में कुछ सेवाएं देने का काम शुरू कर देती हैं। वास्तव में हमारी सामाजिक संरचना के चलते महिलाएं भी अपना बिजनेस खड़ा करने से अधिक एक निश्चित घंटों के लिए जॉब पर जाना अधिक पसंद करती हैं।ऐसी परिस्थतियों में बिजनेस करना उनके लिए अधिक जोखिम वाला हो जाता है। एक बिजनेस उनका अधिक समय और समर्पण मांगता है। हमारी सामाजिक संरचना में जहां महिलाओं को घरेलू जिम्मेदारी के लिए भी फुल टाइम जिम्मेदार माना जाता है, वहां महिलाएं इस तरह का जोखिम उठाने के लिए खुद को असमर्थ पाती हैं।
केरल महिला साक्षरता और महिला उद्यमियों की दृष्टि से संवर्द्धक राज्य है। पर देश के बहुत से इलाकों में महिलाएं अपना उद्यम लगाने के बारे में सोचती तक नहीं हैं। हां, उन्हें अपने कॅरियर की दृष्टि और आर्थिक परेशानी होने पर वे कहीं नौकरी कर पैसे कमाने के बारे में ज्यादा उत्सुक रहती हैं। जिस तरह महिला अपने कॅरियर के बारे में सोचें और उस पर अमल भी करें, यह बात भारतीय परिवेश में जुदा बात होती है, उसी तरह महिलाएं अपना उद्यम खोले और चलाएं यह भी समाज के लिए अनोखी बात होती है। सवाल है कि महिला उद्यमशीलता पर इतना जोर क्यों दिया जाना चाहिए? विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसे संथानों का मानना है कि यदि देश की श्रमशक्ति में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों के बराबर हो जाए, तो देश की जीडीपी में ढाई प्रतिशत तक का उछाल देखा जा सकेगा। जीडीपी के अतिरिक्त महिलाओं की इस तरह भागीदारी सामाजिक चेतना का भी निर्माण करती है, जो देश को समग्र रूप से आगे ले जाने का काम करेगी। पिछले साल इन्हीं दिनों यानी नवंबर, 2017 को महिला उद्यमियों के बारे में देश में शीटवर्क डॉट कॉम ने एक शोध किया। इसके अनुसार महिलाएं उद्यमी हों, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपके यहां महिला कितनी शिक्षित और जागरुक हैं। इसके अध्ययन से पता चलता है कि देश के दक्षिण के राज्य जैसे आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल,पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में सबसे अधिक लघु और मध्यम तरह की महिला उद्यमियों को देखा गया है। इसका कारण यहां महिला शिक्षा की उच्च दर और महिला सशक्तिकरण बताया गया।
इसी तरह नार्थ-ईस्ट के राज्यों जैसे अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और नागालैंड में भी अन्य राज्यों की तुलना में महिला उद्यमी कम, पर पुरुषों के मुकाबले यहां महिला उद्यमी अधिक पाई गईं। इसी तरह इस शोध से यह भी पता लगाया कि लगभग 80 फीसदी महिला उद्यमियों ने अपना बिजनेस अपने पैसों से खड़ा किया या बहुत कम स्तर पर सरकारी स्कीमों, जो महिला उद्यमियों को अपना बिजनेस खड़ा करने में मदद देती हैं, की मदद से खड़ा किया। इस कारण शायद इन योजनाओं के बारे में बहुत कम जानकारी होना था। साथ ही इसमें यह भी बताया गया कि देश में गोवा, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, राजस्थान और पश्चिम बंगाल ऐसे राज्य हैं, जहां सबसे अधिक योजनाएं इस संदर्भ में बनाई गई। जिसका परिणाम आज हमें दिख भी रहा है। इसलिए कहना न होगा कि देश में महिला उद्यमियों की अधिक संख्या हम देखना चाहते हैं तो शिक्षा जागरुकता के साथ-साथ महिला उद्यमियों को प्रेरित करने वाली नीतियों की जरुरत हैं। तभी देश के हर कोने में महिला मॉल जैसी योजनाएं मूर्तरूप में दिखेगीं।


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